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शिशॠको कपड़े में लपेटना (सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤²à¤¿à¤‚ग) – इसे सही तरीके से कब और कैसे करना चाहिà¤
नवजात शिशॠको कपड़े में लपेटने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को (सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤²à¤¿à¤‚ग) कहते हैं जो à¤à¤• शिशॠके लिठबहà¥à¤¤ हीर लाà¤à¤•ारी मानी जाती है। हालांकि, कई बार इस मामले में उचित तकनीक का उपयोग न करने पर यह हानिकारक à¤à¥€ हो सकती है। आमतौर पर, à¤à¤• महीने से कम उमà¥à¤° के शिशà¥à¤“ं के लिठकपड़े में लपेटने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अपनाई जाती है। उससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उमà¥à¤° के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤²à¤¿à¤‚ग उसके हिलने डà¥à¤²à¤¨à¥‡ और विकास में बाधा उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ कर सकता है।
सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤²à¤¿à¤‚ग कà¥à¤¯à¤¾ है?
सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤²à¤¿à¤‚ग शिशà¥à¤“ं को नरà¥à¤® कंबल में लपेटकर शांत करने की à¤à¤• तकनीक है, ताकि यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ किया जा सके कि शिशॠको गरà¥à¤®à¤¾à¤¹à¤Ÿ मिल रही है और उसे आरामदायक महसूस हो रहा है। यह शिशॠको गरà¥à¤®à¤¾à¤¹à¤Ÿ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करके उसे शांत à¤à¥€ करता है। à¤à¤• बचà¥à¤šà¥‡ को दो तरीकों से कपड़े में लपेटा जा सकता है। पहली विधि में अधिक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• होने के कारण थोड़ा कसकर लपेटा जाता है, जबकि दूसरी विधि में उसे ढीला लपेटा जाता है, ताकि शिशॠके हाथ खà¥à¤²à¥‡ रहें। जबकि, बचà¥à¤šà¥‡ के à¤à¤• महीने के होने के बाद à¤à¥€ सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤²à¤¿à¤‚ग की जा सकती है, लेकिन à¤à¤¸à¤¾ तब किया जाता है जब शिशॠसो रहा हो ताकी वह कम हिले डà¥à¤²à¥‡à¥¤
अपने बचà¥à¤šà¥‡ को सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤² कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ करें?
बचà¥à¤šà¥‡ की नींद को बेहतर और आरामदायक बनाने के लिठउसे कपड़े में लपेटा जाता है।
पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚ठमें, यह मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकता है, और कà¤à¥€â€“कà¤à¥€ इससे शिशॠको परेशानी à¤à¥€ हो सकती है। लेकिन अंततः यह पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ आरामदायक और शांतिपूरà¥à¤£ होने के साथ ही बेहतर नींद पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करती है।
यह शिशॠके तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ापेशीय विकास में सà¥à¤§à¤¾à¤° करता है।
पीठके बल सोने के कारण यह नींद के दौरान अकसà¥à¤®à¤¾à¤¤ नवजात की मृतà¥à¤¯à¥ (à¤à¤¸.आई.डी.à¤à¤¸.) के खतरों और उसके पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ को कम करने में मदद करता है।
यह शिशà¥à¤“ं को लंबे समय तक निरà¥à¤¬à¤¾à¤§ नींद लेने में मदद करता है।
यह जनà¥à¤® के पहले महीने के दौरान नवजात को गरà¥à¤ के समान सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ और आराम महसूस कराने में मदद करता है ।
अपने नवजात को सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤² कब करें?
शिशॠको कपड़े में कब लपेटना है, यह à¤à¤• माता–पिता निरà¥à¤à¤° करता है। कà¥à¤› लोग शिशॠके परेशान करने पर उसे दिन के किसी à¤à¥€ समय कपड़े में लपेट देते हैं।अनà¥à¤¯ लोग केवल रात के वकà¥à¤¤ à¤à¤¸à¤¾ करते हैं, ताकि इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में शिशॠको जलà¥à¤¦à¥€ सोने की आदत पड़ सके।
बचà¥à¤šà¥‡ को कैसे सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤² करें?
वैसे तो शिशॠको कपड़े में लपेटते समय कई तकनीकों का पालन किया जाता है, लेकिन सबसे सामानà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की जानकारी नीचे दी गई है:
सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤² करने के लिà¤, कंबल को आड़ा करके रखें, धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि उसका à¤à¤• किनारा नीचे मà¥à¤¡à¤¼à¤¾ हà¥à¤† हो।
बचà¥à¤šà¥‡ को पीठके बल कंबल पर रखें, कà¥à¤› इस तरह कि उसका सिर कंबल के मà¥à¤¡à¤¼à¥‡ हà¥à¤ किनारे के ऊपर हो।
उसकी बाईं बांह को सीधी करें, और कंबल के बाईं तरफ के हिसà¥à¤¸à¥‡ को शरीर पर लपेटें, और इसे दाà¤à¤‚ कंधे और शरीर की दाईं ओर बीच में फंसा दें।
इसके बाद दाहिने हाथ को नीचे रखें, और कंबल के दाà¤à¤‚ हिसà¥à¤¸à¥‡ को उसके शरीर पर बाà¤à¤‚ हाथ के नीचे लपेटें।
इसके बाद कंबल के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ को शिशॠके à¤à¤• तरफ ढीले रूप से मोड़ें । यह à¤à¥€ सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि कंबल जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सखà¥à¤¤ (टाइट) न हो, ताकि शिशॠके कूलà¥à¤¹à¥‡ हिल–डà¥à¤² सकें।
यह शिशॠको कपड़े में लपेटने का सबसे आम तरीका है, जहाठहम बचà¥à¤šà¥‡ को उसकी पीठके बल रखकर कंबल को हीरे के आकार में हलकेसे लपेट देते हैं। यह किनारों को तिरछा करके किया जाता है, ताकि यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ किया जा सके कि शिशॠके दोनों पैर खà¥à¤²à¥‡ रहें और कंबल से बाहर हों। सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤²à¤¿à¤‚ग की अनà¥à¤¯ तकनीकों में वरà¥à¤—ाकार सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤² और सà¥à¤²à¥€à¤ª सैक सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤² à¤à¥€ शामिल हैं। वरà¥à¤—ाकार सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤² à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ तकनीक है, जिसमें शिशॠको à¤à¤• वरà¥à¤—ाकार कंबल पर रखा जाता है। सà¥à¤²à¥€à¤ª सैक सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤² à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ है, जिसमें à¤à¤• समायोजित होने वाला सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤² रैप (लपेटने के लिठकपड़ा) होता है, जिसे शिशà¥à¤“ं में सà¥à¤Ÿà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤² रिफà¥à¤²à¥‡à¤•à¥à¤¸ यानी शिशॠके नींद में चौंकने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को रोकने के लिठबनाया गया है। आप अपने बचà¥à¤šà¥‡ की आरामदायक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के लिठकिसी à¤à¥€ तकनीक का चयन कर सकती हैं। कपड़े में लपेटने की ये तकनीकेंउन नवजात शिशà¥à¤“ं के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अचà¥à¤›à¥€ तरह से सोने की आदत नहीं है, और जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हर वकà¥à¤¤ गोद में लेने की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें कि शिशॠको कपड़े में लपेटना à¤à¤• दोधारी तलवार के समान हो सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसमें लाठऔर हानि समान रà¥à¤ª से शामिल है और यह इस पर निरà¥à¤à¤° करता है कि आप शिशॠको कपड़े में कैसे लपेटती हैं ।
यह पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ शिशà¥à¤“ं और माता–पिता के बीच संबंध और लगाव में बाधा का कारण बन सकती है। इससे कà¥à¤› सामानà¥à¤¯ शारीरिक समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ देखने को मिली हैं। गलत तरीके से कपड़ा लपेटने के कारण आपके बचà¥à¤šà¥‡ को होने वाली पà¥à¤°à¤®à¥à¤– शारीरिक समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हैं:
1. अधिक गरà¥à¤®à¥€
अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• गरà¥à¤®à¥€ à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ खतरा है जो, शिशॠको ठीक तरीके से सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤²à¤¿à¤‚ग न करने के कारण उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो सकता है। हो सकता है कि शिशॠकपड़े के अंदर सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° रूप से खà¥à¤¦ को न हिला–डà¥à¤²à¤¾ सके, इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में शरीर के तापमान में वृदà¥à¤§à¤¿ हो सकती है
2. हिप डिसà¥à¤ªà¥à¤²à¥‡à¤œà¤¿à¤†
हिप डिसà¥à¤ªà¥à¤²à¥‡à¤œà¤¿à¤† à¤à¤• चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है, जो कूलà¥à¤¹à¥‹à¤‚ को हिला–डà¥à¤²à¤¾ न पाने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में होती है, जिससे कूलà¥à¤¹à¥‹à¤‚ की वृदà¥à¤§à¤¿ और विकास बाधित हो जाता है। जब à¤à¥€ शिशॠअपने पैरों को हिलाते हैं, तो सॉकेट के अंदर फीमर हडà¥à¤¡à¥€ की गतिविधि जोड़ों में होने वाले बदलाव में सहयोग करती है। अनà¥à¤¯à¤¥à¤¾, सॉकेट à¤à¤• पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿ जैसी संरचना में विकसित होगा और इस कारण सॉकेट का आकार पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होगा, जिससे कूलà¥à¤¹à¥‡ की गतिविधि में समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ पैदा होंगी। लंबे समय में यह जोड़ों की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¤¿à¤²à¤¤à¤¾ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है।
3. शà¥à¤µà¤¾à¤¸ नली की समसà¥à¤¯à¤¾
जब à¤à¤• बचà¥à¤šà¥‡ को कसकर लपेटा जाता है, तो इससे उसकी सांस लेने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती है, जो शिशॠकी आकसà¥à¤®à¤¿à¤• मृतà¥à¤¯à¥ यानी (आकसà¥à¤®à¤¿à¤• शिशॠमृतà¥à¤¯à¥ सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® – à¤à¤¸.आई.डी.à¤à¤¸.) का कारण बन सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में बचà¥à¤šà¥‡ को लपेटने के सही तरीके का पालन किया जाना चाहिà¤, अनà¥à¤¯à¤¥à¤¾ ऊपरी शà¥à¤µà¤¸à¤¨ पथ के संकà¥à¤°à¤®à¤£ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाà¤à¤—ी।
शिशॠकी सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤²à¤¿à¤‚ग को कब रोकना या उससे परहेज करना चाहिà¤?
सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤²à¤¿à¤‚ग को कब बंद करना चाहिà¤, यह सà¤à¥€ माताओं की पà¥à¤°à¤®à¥à¤– चिंताओं में से à¤à¤• होता है। सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤²à¤¿à¤‚ग à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ तकनीक है जो अंगों की गतिविधि को सीमित या बाधित कर सकती है। मांसपेशियों और केंदà¥à¤°à¥€à¤¯ तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° के विकास के लिठअंगों की गतिविधि जरà¥à¤°à¥€ है। अमेरिकन à¤à¤•ेडमी ऑफ पीडियाटà¥à¤°à¤¿à¤•à¥à¤¸ (à¤.à¤.पी.) के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, अगर आपका बचà¥à¤šà¤¾ लà¥à¤¢à¤¼à¤•ने की कोशिश करने लगे तो आपको सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤²à¤¿à¤‚ग बंद करने पर विचार करना चाहिà¤à¥¤ कई बचà¥à¤šà¥‡ 4 से 6 महीने के बीच à¤à¤¸à¤¾ करना सीख जाते हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ आप रात में नवजात शिशॠको सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤² कर सकते हैं?
हाठ! रात में सà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤²à¤¿à¤‚ग की जा सकती है, ताकि शिशॠको अचà¥à¤›à¥€ नींद मिले, लेकिन यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करने के लिà¤, सही पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं का पालन किया जाना चाहिà¤à¥¤ यदि आप सही तकनीकों और सावधानियों का पालन करती हैं, तो आप 4-5 महीनों तक के लिठसà¥à¤µà¥ˆà¤¡à¤² कर सकती हैं।
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